चांद कौशिक सर्प की अगली गति कौन सी हुई अकॉर्डिंग टू जैनिज्म
Answer
जैन परंपरा में चंडकौशिक सर्प की अगली गति
देवगति मानी गई है — यानी मृत्यु के बाद वह
स्वर्ग/देवलोक में गया। (
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Explanation
कथा के अनुसार भगवान महावीर के उपदेश से उसे अपने पूर्व जन्मों का स्मरण हुआ, उसने हिंसा-भाव छोड़ दिया, और अंत में मृत्यु के बाद वह देवगति को प्राप्त हुआ। (
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Spiritual Understanding
इस कथा का संदेश यह है कि
क्रोध का त्याग, अहिंसा, और पश्चाताप जीव की गति को ऊँचा कर सकते हैं। (
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Takeaway
चंडकौशिक की कथा जैन धर्म में परिवर्तन, करुणा, और आत्म-शुद्धि का सुंदर उदाहरण है। (
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