समरादित्य कथा के अनुसार अग्निशर्मा छठे नरक में गया। ( jainqq.org)
संक्षिप्त समझ
कथा में बताया गया है कि उसके भीतर क्रोध और वैर की भावना बढ़ती गई, और उसी कारण वह अंत में छठे नरक की तीव्र पीड़ा को प्राप्त हुआ। ( jainqq.org)
शिक्षा
जैन धर्म में यह प्रसंग यह सिखाता है कि क्रोध, द्वेष और प्रतिशोध जीव को अधोगति की ओर ले जाते हैं, जबकि क्षमा, शांति और समभाव आत्मा को ऊँचाई की ओर ले जाते हैं। ( jainqq.org)