दीपायन मुनि की कथा
Answer
दीपायन मुनि की कथा जैन परंपरा में क्रोध के विनाशकारी परिणाम और भाव-शुद्धि के महत्व को समझाने वाली प्रसिद्ध कथा है। आचार्य कुन्दकुन्द की अष्टपाहुड की टीका में दीपायन को “द्रव्य-श्रमण” कहकर उनका उदाहरण दिया गया है। ( nikkyjain.github.io)Explanation
कथा के अनुसार, नवम बलभद्र ने श्री नेमिनाथ भगवान से द्वारका की स्थिति के बारे में पूछा। भगवान ने बताया कि रोहिणी का भाई दीपायन, जो बलभद्र का मामा था, बारह वर्ष बाद मद्य के निमित्त से क्रोध करके द्वारका को जला देगा। यह सुनकर दीपायन ने दीक्षा ली और तप के लिए पूर्व देश चला गया। ( nikkyjain.github.io)बारह वर्ष बाद वह द्वारका लौटा और नगर के बाहर तप में स्थित हो गया। उसी समय कुछ कुमार जल समझकर मद्य-मिश्रित पानी पी गए और उन्मत्त होकर दीपायन मुनि को पत्थरों से मारने लगे। इससे दीपायन के भीतर क्रोध उत्पन्न हुआ और उसके तैजस-समुद्घात से द्वारका नगरी भस्म हो गई। ( nikkyjain.github.io)