Mahavir prabhu ke janam ke din kya hua tha
भगवान महावीर का जन्म चैत्र माह की त्रयोदशी तिथि को हुआ था, जिसे "महावीर जयंती" के रूप में मनाया जाता है। जैन ग्रंथों के अनुसार, महावीर प्रभु का जन्म क्षत्रियकुंड ग्राम (वर्तमान बिहार राज्य में) में राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के घर हुआ था।
उनके जन्म के समय कई शुभ और अद्भुत घटनाएँ घटित हुईं, जिन्हें जैन परंपराओं में महत्वपूर्ण माना जाता है:
- सोलह स्वप्न: महावीर की माता त्रिशला ने उनके जन्म से पहले 16 शुभ स्वप्न देखे थे, जिन्हें जैन धर्म में अत्यंत शुभ माना गया है।
- इंद्र द्वारा अभिषेक: जन्म के बाद इंद्र देव ने स्वर्ग से आकर भगवान महावीर का 'अभिषेक' (स्नान) कराया था। इसे 'इंद्राभिषेक' कहा जाता है।
- शांति और प्रसन्नता: महावीर के जन्म के समय पूरे राज्य में शांति, प्रसन्नता और खुशहाली का वातावरण था।
- प्रकृति में बदलाव: ऐसा माना जाता है कि उनके जन्म के समय प्रकृति भी आनंदित हो उठी थी। पेड़-पौधों में फूल खिल उठे, पक्षियों ने मधुर स्वर में गान किया।
- संपूर्ण नगर में उत्सव: भगवान महावीर के जन्म के उपलक्ष्य में नगर में उत्सव और खुशी का माहौल था।
इन घटनाओं को जैन धर्म के अनुयायी आज भी श्रद्धा और भक्ति के साथ स्मरण करते हैं, और महावीर जयंती को बड़े धूमधाम से मनाते हैं।