रसासत्त मंगू आचार्य का अगला भाव क्या होगा
उत्तर
जैन ग्रंथ
मोक्षपुरुषार्थ के अनुसार,
रसासक्ति के कारण आचार्य मंगु शिथिलाचारी हो गए और कालधर्म पाकर व्यन्तरदेव हुए। बाद में उसी देवभाव से उन्होंने अपने पूर्व-पर्याय के शिष्यों को प्रतिबोध भी दिया। (
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स्पष्टीकरण
अर्थात उनका अगला भाव
व्यन्तरदेव का बताया गया है। ग्रंथ में स्पष्ट लिखा है कि रसगृद्धि ने आर्य मंगु को पतन की ओर ले जाकर व्यन्तरदेव-गति तक पहुँचा दिया। (
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आध्यात्मिक समझ
यह प्रसंग यह सिखाता है कि साधना में भी
रसासक्ति बहुत बड़ा दोष है। छोटे-से लगने वाले विषय-लोलुपता भी संयम को कमजोर कर सकती है। (
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निष्कर्ष
इसलिए आचार्य मंगु का अगला भाव
व्यन्तरदेव बताया गया है। (
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