जैन परंपरा के अनुसार ऐरावत क्षेत्र भी एक कर्मभूमि है, और इसमें भी एक अवसर्पिणी/उत्सर्पिणी काल में 24 तीर्थंकरों का प्रादुर्भाव माना जाता है।
Spiritual Understanding
तीर्थंकर वे महान आत्माएँ हैं जो धर्म का मार्ग पुनः स्थापित करती हैं और जीवों को मोक्ष-मार्ग दिखाती हैं।
ऐरावत क्षेत्र में 24 तीर्थंकरों का होना यह दर्शाता है कि वहाँ भी धर्म का प्रकाश समय-समय पर प्रकट होता है।
Takeaway
संक्षेप में: ऐरावत क्षेत्र में 24 तीर्थंकर हुए माने जाते हैं।