देववंदन में 13 नवकार इसलिए गिने जाते हैं क्योंकि देववंदन के बाद होने वाले क्षुद्रोपद्रव उपशम काउस्सग की विधि में, यदि उवसग्गहरं स्तोत्र न हो, तो 13 नवकार गिनने का विधान मिलता है। यानी 13 एक निर्धारित गणना है, नवकार मंत्र की मूल संख्या नहीं। ( jainsite.com)
Explanation
इस विधि में पहले देववंदन समाप्त होता है, फिर काउस्सग किया जाता है। उसी अंग में परंपरागत रूप से लिखा है कि 1 नवकार, पूरा लोगस्स, और अगर उवसग्गहरं न आए तो 13 नवकार का काउस्सग किया जाए। इसलिए देववंदन में 13 नवकार का गिनना उसी विशेष विधि का हिस्सा है। ( jainsite.com)
Spiritual Understanding
इसका भाव यह है कि वंदना केवल शब्दों का पाठ नहीं, बल्कि विनय, उपशम और आत्म-शुद्धि की साधना है। निश्चित संख्या से जप करने पर आराधना में अनुशासन और स्थिरता आती है — यह इस विधि का आध्यात्मिक अर्थ समझा जा सकता है। ( jainsite.com)
Takeaway
संक्षेप में, 13 नवकार देववंदन के एक विशेष काउस्सग-विधान के अनुसार गिने जाते हैं; यह परंपरागत विधि का अंग है। ( jainsite.com)