Acharya Jinkirti suriesvar ki purn Jankari de
Answer
आप जिस आचार्य की बात कर रहे हैं, उपलब्ध जैन स्रोतों में उनका नाम आचार्य जिनकीर्ति सूरि / Jin Kirti Suri मिलता है। वे कोरंटा में विक्रम संवत 1449 में जन्मे थे। वे दवेमल के चौथे पुत्र और मल्लूजी सांखलेचा के पौत्र बताए गए हैं। बाद में आचार्य पद मिलने पर उनका नाम जिनकीर्ति सूरि हुआ। ( oswals.net)Explanation
उपलब्ध जानकारी के अनुसार आचार्य जिनकीर्ति सूरि का सबसे प्रमुख संबंध नाकोड़ा तीर्थ से रहा। कहा जाता है कि जब नाकोड़ा की सूखी टंकी से भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा प्राप्त हुई, तब आचार्य जिनकीर्ति सूरि ने उसका प्रतिष्ठा-विधान किया। उसी प्रसंग में उन्होंने भगवान भैरव की प्रतिमा की स्थापना भी की। बाद में विक्रम संवत 1536 में शाह जेठा ने नाकोड़ा मंदिर में भगवान भैरव के सामने आचार्य जिनकीर्ति सूरि की प्रतिमा स्थापित करवाई। ( oswals.net)जैन हस्तलिखित ग्रंथ-सूचियों में उनके नाम से कुछ कृतियाँ भी दर्ज हैं, जैसे Dhanya Shalibhadra Charitra, Dan Kalpdrum / Dhanya Charitra Dan Kalpdrum, Meghnad Katha, और Merutrayodasi katha आदि। इससे उनके साहित्यिक योगदान का भी संकेत मिलता है। ( jainqq.org)