Ananupurvi ka artha bataye
उत्तर
यदि आपका आशय
“आनुपूर्वी” से है, तो जैन धर्म में इसका अर्थ है
क्रमानुसार आगे बढ़ना / अनुक्रम के अनुसार गमन। कर्म-सिद्धान्त में
आनुपूर्वी नामकर्म वह कर्म माना गया है जो जीव के
अंतराल-गमन में उसकी दिशा और अगले जन्म तक जाने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। (
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Explanation
सरल भाषा में कहें तो, जब जीव एक शरीर छोड़कर दूसरे जन्म की ओर जाता है, तब उसकी गति और दिशा को जैन परिभाषा में
आनुपूर्वी से जोड़ा जाता है। यह नामकर्म जीव को अपने अगले गंतव्य तक उचित दिशा में ले जाने में सहायक माना गया है। (
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Spiritual Understanding
जैन दृष्टि से यह विषय हमें याद दिलाता है कि जीव की यात्रा केवल बाहरी नहीं, बल्कि कर्मों से भी नियंत्रित होती है। इसलिए आत्म-शुद्धि, संयम और ध्यान द्वारा कर्मों को क्षीण करना ही मुक्ति का मार्ग है। (
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Takeaway
आनुपूर्वी = क्रमबद्ध गमन / अनुक्रम के अनुसार गति।
अगर आप चाहें, तो मैं
“आनुपूर्वी” और “अनानुपूर्वी” का अंतर भी सरल शब्दों में समझा सकता हूँ।