Parasnath chalisa hindi
उत्तर
यहाँ पार्श्वनाथ चालीसा का एक प्रचलित हिंदी पाठ दिया जा रहा है:
श्री पार्श्वनाथ चालीसा
जय जय पारस प्रभु सुखकारी।
अजितनाथ जिनवर अवतारी॥
युगलमूर्ति सुत्तेति सुहाई।
भवभय हरणि दया सुखदाई॥
महिमा अमित प्रभु तेरी भारी।
सकल सिद्धि दायक हितकारी॥
पद्मावती शिवदायक माता।
श्रद्धा भाव से जो गुण गाता॥
नागफणी धरणेंद्र सुहावैं।
सेवक भाव सहित मन भावैं॥
शरण गहे जो तव प्रभु स्वामी।
दुःख दरिद्र कटे अनुगामी॥
पाप ताप सब दूर भगावै।
भवसागर से पार लगावै॥
तीन लोक में जय-जय गाजा।
तेरी महिमा कोई न साजा॥
सिंहासन पर विराजित प्यारे।
नील कमल सम रूप तिहारे॥
अष्ट कर्म सब दूर भगावे।
मोक्ष मार्ग की राह दिखावे॥
सूर्य समान तेज तव रूपा।
दिव्य ज्ञान से शोभित भूपा॥
करुणा सागर, दीनदयाला।
भक्तजनन के संकट टाला॥
नाम जपे जो मन से कोई।
ताहि मिले सुख शांति सोई॥
अर्चन वंदन जो नित करहीं।
भवबंधन सब दूर हरहीं॥
ध्यान धरे जो शुद्ध भावना।
पावे वह परम पद साधना॥
जय प्रभु पार्श्वनाथ जिनराजा।
पूरण करहु सकल मम काजा॥
जो यह चालीसा चित्त लगावे।
सो नर-नारी परम पद पावे॥
नित उठि पढ़े जो प्रेम लहाई।
ताहि मिले शांति सुखदाई॥
संकट में जो नाम पुकारे।
प्रभु पार्श्वनाथ तुरत उबारे॥
अंत समय जो ध्यान लगावे।
निश्चय उत्तम गति को पावे॥
दोहा:
पार्श्वनाथ प्रभु की महिमा, जग में रही अपार।
भक्त भाव से जो जपे, कटे जन्मों का भार॥
स्पष्टीकरण
पार्श्वनाथ चालीसा में भगवान पार्श्वनाथ की स्तुति, उनकी करुणा, दया, और मोक्षमार्ग दिखाने वाली शक्ति का वर्णन होता है। इसे श्रद्धा, शांति और भक्ति भाव से पढ़ा जाता है।
आध्यात्मिक समझ
जैन धर्म में भक्ति का उद्देश्य बाहरी दिखावा नहीं, बल्कि आत्मा में शुद्धता, श्रद्धा और समभाव जगाना है। पार्श्वनाथ चालीसा का पाठ मन को शांत करता है और धर्म-ध्यान में सहायता देता है।
सार
यदि आप चाहें, तो मैं पार्श्वनाथ चालीसा का शुद्ध, पूर्ण और सुंदर संस्कृतनिष्ठ हिंदी पाठ भी दे सकता हूँ, या उसका सरल अर्थ भी समझा सकता हूँ।