Sukh dukh janate nahi,per vaidte hai kaun hai
Answer
यह कर्म हैं — विशेषकर वेदनीय कर्म।Explanation
जैन धर्म के अनुसार कर्म स्वयं चेतन नहीं होते, इसलिए वे सुख-दुःख को जानते नहीं। लेकिन उन्हीं के उदय से जीव को सुख और दुःख का अनुभव होता है।Spiritual Understanding
- आत्मा अनुभव करती है।
- कर्म उस अनुभव का कारण बनते हैं।
- इसलिए सुख-दुःख का भोग जीव करता है, पर उसका कारण कर्म होते हैं।