Sukh dukh janate hai, vaidte bi hai kaun hai
Answer
जैन दर्शन के अनुसार आत्मा / जीव ही सुख-दुःख को जानने वाला और अनुभव करने वाला है।Explanation
- शरीर जड़ है, इसलिए वह अपने-आप नहीं जानता।
- आत्मा चेतन है, इसलिए वही:
इसलिए जैन दृष्टि से कहा जाता है कि ज्ञाता और भोक्ता आत्मा ही है।
Spiritual Understanding
जब हम यह समझते हैं कि सुख-दुःख शरीर का नहीं, बल्कि आत्मा के कर्मों से जुड़ा अनुभव है, तब:- आसक्ति कम होती है
- समता बढ़ती है
- और मोक्ष-मार्ग की समझ गहरी होती है