Sukh dukh janate bhi nahi,aur vaidte bhi nahi Kaun hai
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Answer
यह सिद्ध आत्मा या सिद्ध भगवान हैं।Explanation
जैन धर्म में सिद्ध आत्मा वह होती है जिसने सभी कर्मों का पूर्ण क्षय कर दिया हो। इसलिए उसे:- सुख का अनुभव नहीं होता
- दुःख का अनुभव नहीं होता
- वेदना भी नहीं होती
वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर केवल शुद्ध, ज्ञानमय अवस्था में रहती है।