Nem rajul ke 9 bhav
Nem Rajul ke 9 bhav (नैम-रजुल के 9 भाव) जैन परंपरा में भगवान नेमिनाथ (22वें तीर्थंकर) और उनकी पत्नी राजुल (राजिमति) की कथा से संबंधित हैं। यह कथा विशेषकर श्रावक-श्राविकाओं में बहुत प्रसिद्ध है। "9 भाव" का अर्थ है—राजुल और नेमिनाथ के जीवन के वे 9 भाव या प्रसंग जो उनके बीच के संबंध और वैराग्य को दर्शाते हैं। ये प्रसंग निम्नलिखित हैं:
1. बाल्यभाव (बाल्यावस्था का प्रेम): नेमिनाथ और राजुल का बचपन से ही एक-दूसरे के प्रति स्नेह होना।
2. मंगनीभाव (सगाई का भाव): राजुल और नेमिनाथ की सगाई होना।
3. वधूभाव (विवाह का भाव): राजुल का नेमिनाथ से विवाह होना निश्चित होना।
4. बैभवभाव (धन-ऐश्वर्य का भाव): राजुल के परिवार में ऐश्वर्य और साधन संपन्नता का भाव।
5. विवाह-संस्कार भाव: विवाह के संस्कार की तैयारियाँ और उत्सव का भाव।
6. वनभ्रमण भाव: नेमिनाथ जब विवाह के लिए बारात लेकर जाते हैं, रास्ते में पशुओं की करुण पुकार सुनकर वैराग्य आना।
7. विरह भाव: नेमिनाथ के विरक्त होकर तपस्या के लिए चले जाने पर राजुल का विरह भाव।
8. वैराग्य भाव: राजुल का भी संसार से विरक्त होकर तपस्विनी बन जाना।
9. मोक्षभाव: अंत में दोनों का आध्यात्मिक मार्ग पर चलकर मोक्ष की ओर अग्रसर होना।
नोट: यह कथा जैन धर्म में वैराग्य, त्याग और आत्मकल्याण की प्रेरणा देती है। राजुल और नेमिनाथ की कहानी जैन साहित्य, खासकर पद्मपुराण, नेमिनाथ चरित्र आदि ग्रंथों में विस्तृत रूप से वर्णित है।
अगर आपको इन 9 भावों में से किसी एक भाव की विस्तार से जानकारी चाहिए तो कृपया बताएं।