Sathiya mai nevedya ki sahi sthapna
उत्तर
जैन पूजा में
नैवेद्य को साठिया/स्वस्तिक के ऊपरी सिरे पर, यानी उसकी नोक (vertex) पर रखा जाता है। यह आम तौर पर
अक्षत-पूजा के बाद की जाने वाली
नैवेद्य-पूजा का भाग होता है। (
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Explanation
पहले स्वस्तिक/साठिया बनाया जाता है। फिर नैवेद्य उसी स्वस्तिक के शीर्ष पर रखा जाता है। उसी क्रम में
फल ऊपर बने
चंद्र-बिंदु वाले भाग पर रखा जाता है। (
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Spiritual Understanding
जैन परंपरा में नैवेद्य-पूजा का भाव
भोजन के त्याग और
वैराग्य से जुड़ा है। इसका अर्थ तिर्थंकर को भोजन “खिलाना” नहीं, बल्कि भोजन-आसक्ति का समर्पण और संयम का स्मरण है। (
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Takeaway
संक्षेप में:
नैवेद्य साठिया के शीर्ष पर रखा जाता है।