Pancham aara mai 2nd prahar mai kya naas hoga
जैन धर्म के अनुसार, वर्तमान काल चक्र (कालचक्र) के पंचम आरा (पंचम काल) में धर्म की ह्रास (नाश) की प्रक्रिया चल रही है। पंचम आरा को "दु:षमा-दु:षमा" कहा जाता है, जो कि अत्यंत दु:खद और धर्म का क्षय होने वाला युग है।
2nd प्रहर (दूसरा प्रहर) में क्या नाश होगा?
पंचम आरा को 6 भागों (प्रहरों) में बाँटा जाता है। प्रत्येक प्रहर में धर्म और आचरण का एक-एक अंग नष्ट होता जाता है। जैन आगमों के अनुसार, पंचम आरा के दूसरे प्रहर में 'आर्जव धर्म' (सरलता, सरल स्वभाव) का नाश होता है। अर्थात्, लोग छल-कपट, दिखावा, और कपटपूर्ण व्यवहार करने लगते हैं। मन, वचन, काया की सरलता घटने लगती है।
सारांश:
- पंचम आरा, 2nd प्रहर में 'आर्जव धर्म' (सरलता, straightforwardness) का नाश होता है।
संदर्भ:
- तत्त्वार्थ सूत्र, समयसार, और अन्य आगम ग्रंथों में पंचम आरा के धर्मों के क्षय का वर्णन मिलता है।
यदि आपको पंचम आरा के अन्य प्रहरों के बारे में जानकारी चाहिए, तो कृपया बताएं।