Pancham aara mai kon sa nagar Village jaisa hoga
जैन धर्म के अनुसार, पंचम आरा वर्तमान काल का वह भाग है जिसमें हम अभी जीवन यापन कर रहे हैं। पंचम आरा को "दुखमयी काल" या "पंचम काल" भी कहा जाता है। इस काल में धर्म की हानि होती है और सुख-सुविधाएँ, नैतिकता आदि घटती जाती हैं।
जहाँ तक "नागर" या "गाँव" का प्रश्न है, पंचम आरा में नगरीय और ग्रामीण व्यवस्था वैसे ही होती है जैसे आजकल हमारे समाज में देखी जाती है। पुराने काल (चतुर्थ आरा वगैरह) में बड़े-बड़े नगर, अत्यधिक समृद्धि और सुव्यवस्थित जीवन था। पंचम आरा में बड़े नगरों के स्थान पर छोटे-छोटे गाँव और नगर होते हैं, जहाँ सुख-सुविधाएँ, समाज व्यवस्था, सुरक्षा और नैतिकता में गिरावट आ जाती है।
इसका स्पष्ट उल्लेख जैन आगमों में आता है कि पंचम आरा में नगरों की समृद्धि और सुव्यवस्था पूर्वकाल की तुलना में बहुत कम हो जाती है—अर्थात्, गाँव जैसे छोटे-छोटे नगर, सीमित संसाधन, कठिन जीवन और धर्म की कमजोर स्थिति होती है।
संक्षेप में: पंचम आरा में नगर, गाँव जैसे ही होंगे—अर्थात्, अधिकतर छोटे और सीमित संसाधनों वाले, जहाँ सुख-सुविधाएँ और धर्म की स्थिति कमजोर होगी।
यदि आप किसी विशेष नगर या गाँव का नाम पूछ रहे हैं, तो शास्त्रों में पंचम आरा के लिए किसी विशेष नगर का उल्लेख नहीं मिलता, बल्कि सामान्य व्यवस्था का ही वर्णन मिलता है।