जैन धर्म का उदय
जैन धर्म का उदय प्राचीन भारत में हुआ था। जैन परंपरा के अनुसार, जैन धर्म अनादि (सदैव से अस्तित्व में) है, अर्थात इसका कोई विशेष प्रारंभ नहीं है। हालांकि, ऐतिहासिक दृष्टि से जैन धर्म के वर्तमान स्वरूप का विकास छठी शताब्दी ईसा पूर्व में भगवान महावीर (24वें तीर्थंकर) के समय हुआ। महावीर स्वामी ने जैन धर्म के मूल सिद्धांतों को पुनः प्रतिष्ठित किया और उन्हें समाज में प्रचारित किया।
जैन धर्म के मुख्य सिद्धांत हैं: अहिंसा (अहिंसा परमो धर्म), सत्य, अचौर्य (चोरी न करना), ब्रह्मचर्य (इंद्रिय संयम), और अपरिग्रह (कम से कम संग्रह करना)। जैन धर्म के अनुसार, इस संसार में अनंत जीव हैं और आत्मा के मोक्ष के लिए इन सिद्धांतों का पालन आवश्यक है।
संक्षेप में, जैन धर्म का उदय वैदिक काल से भी पूर्व माना जाता है, लेकिन इसका संगठित रूप महावीर स्वामी के काल में लोगों के सामने आया।