जैन धर्म का किस आगम में उल्लेख है
जैन धर्म के प्रमुख ग्रंथों को "आगम" कहा जाता है। आगम ग्रंथ वे पवित्र शास्त्र हैं, जो भगवान महावीर स्वामी के उपदेशों पर आधारित हैं और उनके गणधरों (मुख्य शिष्यों) द्वारा संकलित किए गए हैं। जैन धर्म का उल्लेख इन्हीं आगमों में मिलता है।
श्वेतांबर परंपरा के अनुसार, जैन आगम 45 ग्रंथों में विभाजित हैं, जिनमें 11 अंग आगम, 12 उपांग, 10 प्रधान सूत्र, 6 चेदसूत्र, 4 मूलसूत्र और 2 चूलिका सूत्र शामिल हैं।
दिगंबर परंपरा में मूल आगम लुप्त माने जाते हैं, लेकिन उन्होंने बाद में आचारांग, समवायांग, भगवती सूत्र आदि ग्रंथों की टीका-व्याख्या की है।
इस प्रकार, जैन धर्म का संपूर्ण उल्लेख जैन आगमों में मिलता है, जैसे:
- आचारांग सूत्र (Achārānga Sūtra): जैन धर्म के मूल सिद्धांत, आचार और अहिंसा का वर्णन।
- सूत्कृतांग सूत्र (Sūtrakṛtānga Sūtra): जैन दर्शन और आचार विचार।
- भगवती सूत्र (Bhagavatī Sūtra): महावीर स्वामी के उपदेश और संवाद।
इसलिए, जैन धर्म का उल्लेख मुख्य रूप से जैन आगम ग्रंथों में मिलता है।