जैन धर्म की प्राचीन पुस्तक
जैन धर्म की प्राचीन पुस्तकों को "आगम" या "आगम साहित्य" कहा जाता है। ये ग्रंथ भगवान महावीर के उपदेशों और उनके प्रमुख शिष्यों (गणधरों) द्वारा संकलित किए गए हैं। श्वेतांबर परंपरा के अनुसार, प्रमुख प्राचीन ग्रंथ निम्नलिखित हैं:
- आचारांग सूत्र
- सूत्रकृतांग सूत्र
- समवायांग सूत्र
- स्थानांग सूत्र
- भगवती सूत्र
- नयाधम्मकहा
- उपासक दशांग सूत्र
- अवश्यक सूत्र
- विपाक सूत्र
- दृढवैयावल्य सूत्र
- कल्पसूत्र (महत्वपूर्ण पर्वों पर पढ़ा जाता है)
दिगंबर परंपरा में, मूल आगम लुप्त माने जाते हैं, और उनके अनुसार कुछ प्राचीन ग्रंथ निम्नलिखित हैं:
- षट्खंडागम (आचार्य पुष्पदंत और भूतबलि द्वारा रचित)
- काषायपाहुड़ (आचार्य गुणधर द्वारा रचित)
- समयसार (आचार्य कुंदकुंद द्वारा रचित)
- प्रवचनसार
- नियमसार
ये सभी ग्रंथ जैन धर्म के दर्शन, आचार, और सिद्धांतों का प्राचीन और मौलिक स्रोत हैं।