एकासन ये नियम
Answer
एकासन जैन धर्म में तप का एक प्रकार है, जिसमें साधक एक ही स्थान पर बैठकर, एक ही बार भोजन करता है।
एकासन के सामान्य नियम
- एक ही बार भोजन: पूरे दिन में केवल एक बार भोजन किया जाता है।
- एक ही आसन: भोजन शुरू करने के बाद उसी स्थान और आसन पर बैठकर भोजन पूरा किया जाता है।
- बीच में उठना नहीं: भोजन के दौरान बीच में उठना नहीं चाहिए।
- मर्यादित भोजन: आवश्यकता से अधिक भोजन नहीं करना चाहिए। संयम और भावना मुख्य है।
- सचित्त त्याग: साधारणतः सचित्त पदार्थों का त्याग किया जाता है।
- रात्रि भोजन त्याग: सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं किया जाता।
- भाव शुद्धि: क्रोध, मान, माया, लोभ आदि कषायों से बचने का प्रयास करना चाहिए।
- धर्म ध्यान: दिन में सामायिक, प्रतिक्रमण, स्वाध्याय, जप आदि करना श्रेष्ठ माना जाता है।
Explanation
एकासन का उद्देश्य केवल भोजन कम करना नहीं है, बल्कि इन्द्रिय संयम, इच्छाओं पर नियंत्रण और आत्मशुद्धि है। इसमें भोजन की मात्रा, स्वाद और सुविधा से अधिक महत्व संयम भाव को दिया जाता है।
Spiritual Understanding
जैन धर्म में तप आत्मा को कर्मबंधन से हल्का करने का साधन माना गया है। एकासन से शरीर की आसक्ति घटती है और साधक में नियम, सजगता और वैराग्य की भावना बढ़ती है।
Takeaway
एकासन का सार है: एक बार, एक स्थान पर, संयमपूर्वक भोजन करना और दिन को धर्मभाव में बिताना।
यदि आप पहली बार एकासन कर रहे हैं, तो अपने परिवार के बुजुर्गों, गुरु भगवंत या ज्ञानी श्रावक-श्राविका से अपनी परंपरा के अनुसार विधि पूछकर करना श्रेष्ठ है।