जिस कषायमें सुनाई नहीं देता उसे क्या कहते हैं
Answer
जैन दर्शन में जिस कषाय में समझाने पर भी बात सुनाई नहीं देती / असर नहीं होता, उसे सामान्यतः अनन्तानुबंधी कषाय कहा जाता है।
Explanation
कषाय चार प्रकार के माने जाते हैं:
- अनन्तानुबंधी कषाय — अत्यंत तीव्र कषाय, जो सम्यग्दर्शन को रोकती है।
- अप्रत्याख्यानावरण कषाय
- प्रत्याख्यानावरण कषाय
- संज्वलन कषाय — सबसे मंद कषाय।
जब क्रोध, मान, माया या लोभ इतना तीव्र हो कि व्यक्ति सही बात भी सुनने या स्वीकार करने को तैयार न हो, तो वह बहुत घोर कषाय की अवस्था मानी जाती है।
Takeaway
ऐसी तीव्र कषाय आत्मा को सम्यग्दर्शन और शांति से दूर करती है, इसलिए जैन धर्म में कषायों को शांत करना बहुत आवश्यक माना गया है।