श्वेतांबर जैन मंदिर के पुजारी प्रशिक्षण (training)के पाठ
Answer
श्वेतांबर जैन मंदिर में पुजारी प्रशिक्षण के “पाठ” सामान्यतः मंदिर-सेवा, जिनपूजा, विधि-विधान, शुद्धि, अनुशासन और भक्तिभाव से जुड़े होते हैं। अलग-अलग गच्छ, संघ और मंदिरों में पद्धति में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए अंतिम प्रशिक्षण स्थानीय आचार्य, उपाध्याय, साधु-साध्वी भगवंत या मंदिर के अधिकृत विधिकार से ही लेना चाहिए।
मुख्य प्रशिक्षण-विषय
- जैन धर्म की मूल समझ
- अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु की महिमा
- नवकार मंत्र का अर्थ और महत्व
- अहिंसा, संयम, अपरिग्रह, सत्य, ब्रह्मचर्य की भावना
- मंदिर-शुद्धि और आचरण
- मंदिर में प्रवेश से पहले शरीर, वस्त्र और मन की शुद्धि
- मुखवस्त्रिका, स्वच्छ वस्त्र, विनय और मौन/मर्यादा
- जिनप्रतिमा, वेदी, पूजा-सामग्री और भंडार की पवित्रता
- दैनिक मंदिर-सेवा
- मंदिर खोलना और बंद करना
- वेदी की सफाई
- पूजा-सामग्री व्यवस्थित करना
- दीपक, धूप, चंदन, अक्षत आदि की व्यवस्था
- जिनपूजा की विधि
- अष्टप्रकारी पूजा की समझ
- जल पूजा, चंदन पूजा, पुष्प पूजा, धूप पूजा, दीप पूजा, अक्षत पूजा, नैवेद्य पूजा, फल पूजा का भावार्थ
- पूजा में द्रव्य-शुद्धि और भाव-शुद्धि
- स्नात्र पूजा / अभिषेक विधि
- प्रतिमा स्पर्श की मर्यादा
- जल, केसर, चंदन आदि का शुद्ध उपयोग
- अभिषेक के समय विनय और सावधानी
- आरती और मंगल दीवो
- आरती की विधि
- मंगल दीवो की विधि
- आरती के समय भाव, शुद्धता और सावधानी
- प्रतिक्रमण और आवश्यक पाठों की जानकारी
- नवकार मंत्र
- लोगस्स
- इच्छामि खमासमणो
- तस्स उत्तरी
- करेमि भंते
- खमेमि सव्वे जीवा
- पर्व और विशेष विधि
- पर्युषण
- आयंबिल ओली
- महावीर जन्म कल्याणक
- ज्ञान पंचमी
- अंजनशलाका, प्रतिष्ठा आदि अवसरों की मर्यादा
- अहिंसा-संबंधी सावधानियां
- जल छानना
- रात्रि में सावधानी
- जीव हिंसा कम करने के नियम
- पूजा-सामग्री का सावधानीपूर्वक उपयोग
Spiritual Understanding
जैन मंदिर का पुजारी केवल विधि करने वाला व्यक्ति नहीं माना जाता, बल्कि वह जिनालय की पवित्रता, पूजा की मर्यादा और भक्तों के भाव को संभालने वाला सेवक होता है। इसलिए प्रशिक्षण में केवल “कैसे करना है” नहीं, बल्कि “किस भाव से करना है” यह भी बहुत महत्वपूर्ण है।
Takeaway
श्वेतांबर जैन पुजारी प्रशिक्षण में मुख्य रूप से शुद्धि, विनय, जिनपूजा-विधि, अष्टप्रकारी पूजा, स्नात्र पूजा, आरती, आवश्यक मंत्र-पाठ और अहिंसा की सावधानियों का अध्ययन कराया जाता है। सही विधि के लिए अपने स्थानीय संघ या अधिकृत जैन विधिकार से प्रत्यक्ष प्रशिक्षण लेना श्रेष्ठ है।