Shantinath bhagwan ke bare me batao
श्री शांतिनाथ भगवान जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर हैं। वे अवसर्पिणी काल के तीर्थंकरों में से एक हैं। शांतिनाथ भगवान का जन्म इक्ष्वाकु वंश में हस्तिनापुर (वर्तमान में उत्तर प्रदेश) में हुआ था। उनके पिता का नाम विश्वसेन और माता का नाम अचिरा (अचिरा देवी) था।
शांतिनाथ भगवान का जीवन बहुत ही शांतिपूर्ण और त्यागमय रहा। उन्होंने राजपाट छोड़कर दीक्षा ली और तपस्या के पश्चात केवलज्ञान (कैवल्य ज्ञान) की प्राप्ति की। शांतिनाथ भगवान का चिन्ह (लांछन) मृग (हिरण) है। उनका वर्ण सुवर्ण (सुनहरा) बताया गया है।
भगवान शांतिनाथ ने अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के सिद्धांतों का प्रचार किया। वे मोक्ष प्राप्त कर सिद्ध पद को प्राप्त हुए। शांतिनाथ भगवान को जैन धर्म में शांति, संयम और तपस्या का प्रतीक माना जाता है।
मुख्य तथ्य:
- तीर्थंकर क्रम: 16वें
- जन्म स्थान: हस्तिनापुर
- माता-पिता: अचिरा देवी और विश्वसेन राजा
- लांछन (चिन्ह): मृग (हिरण)
- वर्ण: सुवर्ण (सुनहरा)
- उपदेश: अहिंसा, संयम, शांति
श्री शांतिनाथ भगवान की पूजा जैन समाज में श्रद्धा और भक्ति के साथ की जाती है।