Pakhand Bina ji duniya kaunsi
आपका प्रश्न "पाखंड बिना जी दुनिया कौनसी" Jainism (जैन धर्म) से जुड़ा है। जैन धर्म में "पाखंड" का अर्थ है—कपट, धोखा, या बाहरी आडंबर दिखाना, जबकि भीतर से वैसा न होना। जैन धर्म में सच्चाई (Satya), अहिंसा (Ahimsa), और अपरिग्रह (Aparigraha) जैसे सिद्धांतों पर जोर दिया गया है और पाखंड का त्याग करने की शिक्षा दी गई है।
आचार्य और जैन शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति पाखंड (कपट) को त्याग कर सच्चे मन, वचन और कर्म से धर्म का आचरण करता है, वही मोक्ष (Moksha) का मार्ग प्राप्त करता है। ऐसी दुनिया या समाज, जहाँ लोग बिना पाखंड के जीते हैं, उसे "सत्संग" या "सद्गृहस्थ" कहा जा सकता है—यानि जहाँ सत्य, अहिंसा और धर्म का पालन हो। जैन धर्म के अनुसार, पाखंड रहित जीवन ही सच्चा धार्मिक जीवन है और वही मोक्ष का मार्ग है।
संदर्भ:
- जैन आगम शास्त्र
- तत्त्वार्थ सूत्र (Acharya Umaswati)
यदि आपको पाखंड के संबंध में कोई विशेष श्लोक या उदाहरण चाहिए, तो कृपया बताएं।