सहाव-लट्ठा सम-प्पइट्ठा, अदोस-दुट्ठा गुणेहिं जिट्ठा. पसाय-सिट्ठा तवेण पुट्ठा, सिरीहिं इट्ठा रिसीहिं जुट्ठा....................................... 33वानवासिआ meaning
Answer
यह गाथा “वानवासिआ” देवियों/देवताओं के वर्णन से संबंधित है। इसका सरल अर्थ है कि वे अपने स्वभाव में श्रेष्ठ, समान रूप से प्रतिष्ठित, दोषों से रहित, गुणों में बड़े, प्रसन्नता/शांति से युक्त, तप से पवित्र, श्री/समृद्धि से शोभित और ऋषियों द्वारा सेवित/सम्मानित हैं।
शब्दार्थ
- सहाव-लट्ठा — स्वभाव से सुंदर/श्रेष्ठ
- सम-प्पइट्ठा — समान रूप से प्रतिष्ठित, संतुलित रूप से स्थित
- अदोस-दुट्ठा — दोषों से रहित, दुष्टता से दूर
- गुणेहिं जिट्ठा — गुणों में श्रेष्ठ
- पसाय-सिट्ठा — प्रसाद/शांति/प्रसन्नता से युक्त
- तवेण पुट्ठा — तप से पवित्र/पुष्ट
- सिरीहिं इट्ठा — श्री/ऐश्वर्य/शोभा से प्रिय
- रिसीहिं जुट्ठा — ऋषियों द्वारा सेवित/सम्मानित
भावार्थ
ये वानवासी देव अपने गुणों, शांति, पवित्रता और सौम्यता के कारण पूजनीय बताए गए हैं। उनका वर्णन बाहरी वैभव के लिए नहीं, बल्कि उनके शुद्ध भाव, गुण और तप से जुड़ी महिमा बताने के लिए किया गया है।
Takeaway
इस गाथा का मुख्य भाव है: सच्ची शोभा स्वभाव, गुण, शांति और तप से आती है।