Pakhand Bina ki duniya kaunsi
आपका प्रश्न "पाखंड बिना की दुनिया कौनसी?" है। जैन धर्म के अनुसार, "पाखंड" का अर्थ है ढोंग, छल, या आडंबर—जो कि सच्चे धर्म या आचार से विपरीत है। जैन दर्शन में सच्चा धर्म सत्य (Satya), अहिंसा (Ahimsa), अपरिग्रह (Aparigraha), अचौर्य (Asteya), और ब्रह्मचर्य (Brahmacharya) का पालन करना है, जिसमें पाखंड या आडंबर के लिए कोई स्थान नहीं है।
जैन ग्रंथों के अनुसार, पाखंड मुक्त जीवन ही मोक्ष (आत्मा की शुद्धि और परम शांति) की ओर ले जाता है। 'पाखंड-रहित' दुनिया वह है, जहाँ सब जीव सत्यता, अहिंसा और धर्म के मार्ग पर चलते हैं, और अपनी आत्मा की शुद्धि के लिए प्रयासरत रहते हैं। ऐसी दुनिया को जैन धर्म में 'सिद्ध लोक'—जहाँ मुक्त आत्माएँ (सिद्ध) निवास करती हैं—समझा जा सकता है, क्योंकि वहाँ पाखंड, राग, द्वेष, मोह आदि दोष नहीं होते।
संक्षेप में, जैन धर्म के अनुसार पाखंड रहित दुनिया का आदर्श 'सिद्ध लोक' (मुक्त आत्माओं की अवस्था) है, और इस लोक में पहुँचने का मार्ग सत्य, अहिंसा और सम्यक आचरण है।