In Jain Dharma, Dvādaśāṅga means in hindi
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उत्तर
जैन धर्म में द्वादशांग का अर्थ है — बारह अंग।
यह जैन आगम साहित्य का प्रमुख भाग माना जाता है। “द्वादश” का अर्थ होता है बारह और “अंग” का अर्थ होता है भाग या अध्याय।
Explanation
जैन परंपरा के अनुसार भगवान महावीर की वाणी को गणधर भगवंतों ने व्यवस्थित रूप से जिन आगमों में संकलित किया, उनमें मुख्य रूप से द्वादशांग यानी 12 अंगों का वर्णन आता है।
ये बारह अंग जैन सिद्धांत, आचार, दर्शन, साधना, कर्म सिद्धांत और मोक्षमार्ग से संबंधित ज्ञान का आधार माने जाते हैं।
Takeaway
सरल शब्दों में, द्वादशांग = जैन आगमों के बारह मुख्य अंग।