अध्ययन करेत करते भगवान कौन बनें?
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उत्तर
जैन परंपरा के अनुसार अध्ययन करते-करते भगवान महावीर स्वामी नहीं बने, बल्कि वे जन्म से ही तीर्थंकर नामकर्म के कारण भावी तीर्थंकर थे।
उन्होंने आत्म-साधना, तप, संयम और केवलज्ञान प्राप्त करके तीर्थंकर भगवान महावीर के रूप में संसार को धर्ममार्ग बताया।
स्पष्टीकरण
यदि आपका प्रश्न यह है कि “पढ़ाई/अध्ययन करते-करते कौन भगवान बने?”, तो जैन धर्म में भगवान बनने का अर्थ सामान्य पढ़ाई से नहीं है।
जैन दर्शन के अनुसार आत्मा भगवानत्व को प्राप्त करती है जब वह:
- राग-द्वेष का क्षय करती है,
- कर्मों का नाश करती है,
- सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र अपनाती है,
- और अंत में केवलज्ञान तथा मोक्ष प्राप्त करती है।
Takeaway
जैन धर्म में “भगवान” बनना बाहरी अध्ययन से नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, संयम, तप और कर्मक्षय से होता है।