माता ने अपने पुत्र को संत महाराज को वोहरा दिया
आपका प्रश्न जैन धर्म से संबंधित है, लेकिन इसमें 'वोहरा दिया' का अर्थ स्पष्ट नहीं है। कृपया स्पष्ट करें कि आप किस संदर्भ में पूछ रहे हैं—क्या आप पूछना चाह रहे हैं कि माता ने अपने पुत्र को संत महाराज की सेवा या दीक्षा के लिए सौंप दिया? या कोई अन्य संदर्भ है?
यदि आप जैन धर्म में माता द्वारा पुत्र को मुनि दीक्षा या तपस्वी जीवन के लिए समर्पित करने के विषय में पूछ रहे हैं, तो यह एक पुण्यकारी कार्य माना जाता है। जैन परंपरा में माता-पिता अपने पुत्र या पुत्री को संयम मार्ग (मुनि दीक्षा या आर्यिका दीक्षा) के लिए प्रोत्साहित करते हैं और जब संतान दीक्षा लेती है, तो माता-पिता को भी पुण्य की प्राप्ति होती है। यह त्याग, अहिंसा और मोक्षमार्ग की ओर एक महान कदम माना जाता है।
यदि आपका प्रश्न किसी अन्य विषय से संबंधित है, तो कृपया स्पष्ट करें।