मंद कषाय रूप भाव एवं परिणामों से कौन सी गति प्राप्त होती है
मंद कषाय रूप भाव एवं परिणामों से देव गति (स्वर्ग या देव लोक) प्राप्त होती है।
जैन धर्म के अनुसार, जीव के कर्मों के आधार पर उसकी आगे की गति (गति का अर्थ है—जन्म की अवस्था: देव, मनुष्य, तिर्यंच, नारकी) निर्धारित होती है। जब किसी जीव के भीतर कषाय (क्रोध, मान, माया, लोभ) बहुत मंद (कम) होते हैं, और उसके भाव एवं परिणाम शुद्ध और शांत होते हैं, तो वह पुण्य का बंध करता है, जिससे उसे देव गति प्राप्त होती है।
सारांश: मंद कषाय रूप भाव एवं परिणामों से देव गति प्राप्त होती है।