जो स्व पर को भुला दे उसे क्या कहते हैं?
जैनism के अनुसार, जो व्यक्ति "स्व" (आत्मा) और "पर" (अन्य) का भेद भूल जाता है, उसे "मोह" या "अविवेकी" कहा जाता है। यह व्यक्ति राग-द्वेष, अज्ञान, और मोह के कारण आत्मा की सच्ची प्रकृति को नहीं समझ पाता। जैन दर्शन में आत्मा के सच्चे स्वरूप का ज्ञान प्राप्त करना मुक्ति के मार्ग पर सबसे आवश्यक माना गया है। जो स्व और पर का भेद समझता है, वही सम्यक् दर्शन और सम्यक् ज्ञान की ओर अग्रसर होता है।