ज्ञान दर्शन का व्यापार है
आपका कथन "ज्ञान दर्शन का व्यापार है" के संबंध में, जैन दर्शन में "ज्ञान" (Knowledge) और "दर्शन" (Perception/Faith) दोनों आत्मा के गुण माने गए हैं। जैन दर्शन के अनुसार, "ज्ञान" वस्तु के सही स्वरूप को जानने की क्षमता है, जबकि "दर्शन" वस्तु के सामान्य अस्तित्व को स्वीकारने की भावना या श्रद्धा है।
"ज्ञान" और "दर्शन" का 'व्यापार' शब्द यहाँ सही नहीं बैठता, क्योंकि जैन दर्शन में इनका उद्देश्य आत्मा की शुद्धता और मोक्ष प्राप्ति है, न कि सांसारिक व्यापार या लेन-देन। जैन साहित्य में पाँच प्रकार के ज्ञान (मति, श्रुत, अवधि, मनःपर्यय, केवल ज्ञान) और तीन प्रकार के दर्शन (चक्षुदर्शन, अचक्षुदर्शन, अवधिदर्शन) बताए गए हैं, जो आत्मा की शुद्धता की ओर ले जाते हैं।
इसलिए, जैन दृष्टि से "ज्ञान" और "दर्शन" आत्मा के शुद्ध गुण हैं, और मोक्ष मार्ग में सहायक हैं, न कि व्यापार का साधन।