व्यापार आदि में होने वाले हिंसा कौन सी हिंसा है
जैन धर्म के अनुसार, व्यापार आदि में होने वाली हिंसा को "उद्योगिनी हिंसा" (उद्योगजन्य हिंसा या व्यापारिक हिंसा) कहा जाता है। जैन धर्म हिंसा को चार प्रकार में विभाजित करता है:
- उदयज हिंसा (उद्योगिनी हिंसा) – यह वह हिंसा है जो जीविका, व्यापार, कृषि, व्यवसाय आदि के दौरान अनजाने में होती है।
- संचित्त हिंसा – यह जानबूझकर, सोच-समझकर, किसी उद्देश्य से की जाने वाली हिंसा है।
- उद्यम हिंसा – यह हिंसा किसी विशेष परिस्थिति या सुरक्षा के लिए की जाती है।
- विरुद्ध हिंसा – यह हिंसा विरोध या आक्रोश के कारण की जाती है।
जैन धर्म में अहिंसा को सर्वोपरि माना गया है, इसलिए अनुयायियों को व्यापार आदि में भी यथासंभव हिंसा से बचने और संयम रखने की शिक्षा दी गई है।