jeev ne sharir ma purnar karma nu naam अ thi start thai
Jainism अनुसार, जीव (jeev) जब तक कर्मों के बंधन में है, तब तक वह शरीर धारण करता है। जब जीव नवीन (purnar) कर्मों को शरीर में बाँधता है, उस प्रक्रिया को आस्रव (Aasrav) कहा जाता है, जो 'अ' अक्षर से शुरू होता है।
आस्रव का अर्थ है—कर्मों का आत्मा में प्रवेश करना या बाँधना। यह कारण बनता है कि आत्मा संसार (संसार चक्र) में बनी रहती है और बार-बार शरीर धारण करती है।
इस प्रकार, "अ" से शुरू होने वाला वह शब्द है—आस्रव.