खेचर के भव मे स्त्री याने कौन ?
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Answer
जैन धर्म में “खेचर के भव में स्त्री” का अर्थ सामान्यतः देवगति के व्यंतर देवों की स्त्री से होता है।
खेचर शब्द का अर्थ है — आकाश में गमन करने वाले। जैन परंपरा में यह शब्द प्रायः व्यंतर देव वर्ग के देवों के लिए आता है।
Explanation
जैन दर्शन में देवों के कई प्रकार बताए गए हैं, जैसे:
- भवनवासी देव
- व्यंतर देव
- ज्योतिषी देव
- वैमानिक देव
इनमें व्यंतर देव आकाश में विचरण करने वाले माने जाते हैं, इसलिए उन्हें कभी-कभी खेचर कहा जाता है।
इसलिए “खेचर के भव में स्त्री” का अर्थ है:
- ऐसी जीव आत्मा जिसने स्त्री रूप में व्यंतर देवगति प्राप्त की हो।
- अर्थात वह मनुष्य स्त्री नहीं, बल्कि देव योनि की स्त्री होती है।
Spiritual Understanding
जैन धर्म के अनुसार आत्मा अपने कर्मों के अनुसार अलग-अलग गति और भव प्राप्त करती है। स्त्री, पुरुष या नपुंसक शरीर भी कर्मों के उदय से मिलता है। इसलिए “खेचर के भव में स्त्री” आत्मा की एक विशेष जन्म-अवस्था को दर्शाता है, आत्मा का स्थायी स्वरूप नहीं।
Takeaway
खेचर के भव में स्त्री का सरल अर्थ है — व्यंतर देवगति में स्त्री रूप वाला जीव।