क्षायिक समकित कितने बार प्राप्त हो सकता है
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Answer
जैन धर्म के अनुसार क्षायिक सम्यक्त्व केवल एक ही बार प्राप्त होता है।
Explanation
सम्यक्त्व के भेदों में क्षायिक सम्यक्त्व वह अवस्था है जिसमें दर्शन-मोहनीय कर्म का पूर्ण क्षय हो जाता है।
क्योंकि यहाँ कर्म का केवल उपशम नहीं, बल्कि संपूर्ण नाश होता है, इसलिए वह कर्म फिर वापस उदय में नहीं आता। इसी कारण क्षायिक समकित एक बार प्राप्त होने के बाद नष्ट नहीं होता।
Spiritual Understanding
क्षायिक सम्यक्त्व अत्यंत उच्च और स्थायी आध्यात्मिक अवस्था है। यह जीव को मोक्षमार्ग में दृढ़ कर देता है, क्योंकि उसकी सम्यक श्रद्धा अब कर्मों से ढकती नहीं है।
Takeaway
क्षायिक समकित जीवन में केवल एक बार प्राप्त होता है और फिर कभी छूटता नहीं।