उवसग्गहरं स्तोत्र hindi
उत्तर
उवसग्गहरं स्तोत्र जैन धर्म का अत्यंत प्रसिद्ध और श्रद्धापूर्ण स्तोत्र है। यह भगवान पार्श्वनाथ प्रभु की स्तुति में रचा गया माना जाता है और उपसर्गों, विघ्नों तथा कष्टों के निवारण के लिए भक्ति भाव से पढ़ा जाता है।
हिंदी अर्थ
इस स्तोत्र का भाव यह है कि साधक भगवान पार्श्वनाथ प्रभु की शरण लेकर उनसे प्रार्थना करता है कि वे उसके जीवन के उपसर्गों, बाधाओं और भय को दूर करें तथा उसे सम्यक् श्रद्धा, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर स्थिर करें।
भगवान पार्श्वनाथ प्रभु को करुणामय, शरणदाता और उपसर्गों को हरने वाले प्रभु के रूप में वंदन किया जाता है। स्तोत्र में प्रभु की दिव्य महिमा, उनकी शांति, उनकी आत्मिक शक्ति और उनके चरणों की शरण का गुणगान किया गया है।
सरल भावार्थ
- हे भगवान पार्श्वनाथ प्रभु, आप उपसर्गों और विघ्नों को दूर करने वाले हैं।
- आपकी शरण में आने से भय और संकट शांत होते हैं।
- आपकी भक्ति से आत्मा में शांति, श्रद्धा और धैर्य उत्पन्न होता है।
- आपका स्मरण साधक को पाप, मोह और अशुभ भावों से दूर करता है।
- आपकी कृपा से साधक धर्ममार्ग में स्थिर होता है।
आध्यात्मिक समझ
जैन धर्म में स्तोत्र का पाठ केवल बाहरी संकट दूर करने के लिए नहीं, बल्कि भीतर के कषायों—क्रोध, मान, माया और लोभ—को शांत करने के लिए भी किया जाता है।
उवसग्गहरं स्तोत्र का सच्चा लाभ तब माना जाता है जब साधक इसे श्रद्धा, शुद्ध भाव, अहिंसा, संयम और आत्मचिंतन के साथ पढ़ता है।
मुख्य संदेश
उवसग्गहरं स्तोत्र हमें यह सिखाता है कि भगवान की भक्ति और धर्म में दृढ़ श्रद्धा से मन शांत होता है, भय कम होता है और आत्मा मोक्षमार्ग की ओर आगे बढ़ती है।