जो मुनि गुण अवगुण दोनों के धारक हो वे क्या कहलाते है
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उत्तर
जो मुनि गुण और अवगुण दोनों के धारक होते हैं, वे सामान्यतः छद्मस्थ मुनि कहलाते हैं।
Explanation
जैन धर्म में छद्मस्थ वह साधु या जीव होता है जिसे अभी केवलज्ञान प्राप्त नहीं हुआ है। इसलिए उसमें आत्म-साधना के अनेक गुण होते हैं, लेकिन कर्मों के उदय के कारण कुछ कमियाँ या अवगुण भी शेष रह सकते हैं।
- गुण — संयम, तप, स्वाध्याय, विनय, त्याग आदि।
- अवगुण — अभी पूर्ण वीतरागता न होने के कारण सूक्ष्म राग-द्वेष या प्रमाद की संभावना।
Spiritual Understanding
केवलज्ञानी भगवान पूर्ण रूप से दोषरहित होते हैं। परंतु छद्मस्थ मुनि साधना-पथ पर होते हैं; वे मोक्षमार्ग में आगे बढ़ रहे होते हैं, इसलिए उनमें महान गुण होते हुए भी पूर्णता अभी प्राप्त नहीं हुई होती।
Takeaway
गुण-अवगुण दोनों से युक्त मुनि = छद्मस्थ मुनि।