tum darishan sukhkar rishabhjin
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आपका प्रश्न “तुम दर्शन सुखकर ऋषभजिन” एक प्रसिद्ध जैन स्तुति का आरंभिक भाग है। यह स्तुति भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ), जो जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं, की महिमा में गायी जाती है।
इसका अर्थ है: "हे ऋषभदेव जिनेन्द्र! आपका दर्शन अत्यंत सुखदायक है।"
इस स्तुति के माध्यम से श्रद्धालु भगवान ऋषभदेव की वन्दना करते हैं और उनके गुणों का स्मरण करते हैं। ऋषभदेव का जीवन, त्याग, तपस्या और अहिंसा का आदर्श जैन धर्म में अत्यंत पूजनीय है।
यदि आप इस स्तुति के आगे के श्लोक या अर्थ जानना चाहते हैं, तो कृपया बताएं।