आप सामयिकी कर रहे हो ओर उठते ही बत्तमीजी शुरू कर दे आए करने वाले लोगों के लिए कुछ बोले
उत्तर
जो व्यक्ति सामायिक जैसी पवित्र साधना करके उठते ही बदतमीज़ी, क्रोध या कटु वचन शुरू कर दे, उसके लिए शांति से इतना कहा जा सकता है:
“सामायिक केवल बैठने का नाम नहीं है; सामायिक का भाव उठने के बाद भी व्यवहार में दिखना चाहिए। यदि वाणी में क्रोध और व्यवहार में कठोरता आ जाए, तो हमें फिर से अपने भीतर देखना चाहिए।”
समझ
जैन धर्म में सामायिक का उद्देश्य है:
- राग-द्वेष को शांत करना
- मन, वचन और काया को संयमित करना
- क्षमा, विनय और समता का अभ्यास करना
- किसी को दुःख न पहुँचाने का भाव रखना
यदि सामायिक के तुरंत बाद व्यक्ति कठोर बोलता है, अपमान करता है या गुस्सा करता है, तो इसका अर्थ है कि सामायिक का बाहरी नियम हुआ, पर उसका भाव अभी भीतर गहराई से नहीं उतरा।
कैसे बोलें
आप कठोर जवाब देने के बजाय शांत भाव से कह सकते हैं:
- “अभी आपने सामायिक की है, इसलिए आपकी वाणी में और अधिक शांति शोभा देती है।”
- “धर्म करने के बाद हमारा व्यवहार और मधुर होना चाहिए।”
- “सामायिक का असली फल समता, क्षमा और शांत वाणी में दिखता है।”
- “यदि मुझसे कोई गलती हुई हो तो क्षमा, लेकिन कृपया शांत भाव से बात करें।”
आध्यात्मिक समझ
दूसरे की गलती देखकर अपने अंदर क्रोध लाना भी हमारे लिए उचित नहीं है। जैन मार्ग हमें सिखाता है कि सामने वाला अशांत हो, तब भी हमें अपनी समता बचानी चाहिए।
इसलिए ऐसे व्यक्ति को सुधारने की भावना होनी चाहिए, अपमान करने की नहीं।
निष्कर्ष
सामायिक का सच्चा प्रभाव पूजा-स्थान में नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के व्यवहार में दिखता है। जो सामायिक के बाद भी विनम्र, शांत और क्षमाशील रहता है, वही सामायिक के भाव को सही रूप में जीवन में उतारता है।