राजीमती के रुप को देखकर मुग्ध हुए
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उत्तर
राजीमती के रूप को देखकर रथनेमि मोहित हुए थे।
व्याख्या
जैन परंपरा के अनुसार राजीमती, भगवान नेमिनाथ की होने वाली वधू थीं। जब भगवान नेमिनाथ ने विवाह से पहले पशुओं की करुण पुकार सुनकर संसार-त्याग कर दिया, तब राजीमती ने भी वैराग्य का मार्ग अपनाया।
बाद में रथनेमि ने राजीमती के रूप को देखकर मोहवश उनके प्रति आकर्षण प्रकट किया। राजीमती ने उन्हें धर्म, संयम और वैराग्य का उपदेश देकर उनके मोह को दूर किया।
आध्यात्मिक समझ
यह प्रसंग बताता है कि बाहरी रूप क्षणभंगुर है, जबकि आत्मसंयम और वैराग्य ही सच्चा आध्यात्मिक सौंदर्य है। राजीमती का चरित्र जैन धर्म में शील, संयम और दृढ़ वैराग्य का आदर्श माना जाता है।