तीन गौरव में से एक है
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उत्तर
जैन धर्म में तीन गौरव में से एक है:
सम्यक् दर्शन गौरव
तीन गौरव सामान्यतः ये माने जाते हैं:
- सम्यक् दर्शन गौरव
- सम्यक् ज्ञान गौरव
- सम्यक् चारित्र गौरव
अर्थ
इनका संबंध जैन धर्म के रत्नत्रय — सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चारित्र — से है। साधक को इन तीनों के प्रति गौरव, श्रद्धा और आदर रखना चाहिए।