एक भवन जो केवलज्ञानी होने का सूचक है?:
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उत्तर
जैन धर्म में समवसरण वह दिव्य उपदेश-सभा/भवन है जो किसी तीर्थंकर के केवलज्ञान प्राप्त होने के बाद प्रकट होती है।
व्याख्या
जब तीर्थंकर भगवान को केवलज्ञान प्राप्त होता है, तब देवों द्वारा समवसरण की रचना की जाती है। इसमें भगवान सभी जीवों को बिना भेदभाव के धर्मोपदेश देते हैं।
समवसरण में:
- देव, मनुष्य और तिर्यंच सभी धर्म सुन सकते हैं।
- सभी जीव अपनी-अपनी भाषा में उपदेश को समझते हैं।
- वहाँ पूर्ण शांति और अहिंसा का वातावरण होता है।
Takeaway
समवसरण केवलज्ञानी तीर्थंकर के प्रकट धर्मोपदेश का पवित्र प्रतीक है।