Stuli Bhadra Ne Kiska Abhiman Kiya
स्तुलिभद्र (Stulibhadra) जैन धर्म के प्रसिद्ध श्रावक (गृहस्थ) और बाद में मुनि बने हैं। स्तुलिभद्र के अभिमान की प्रसिद्ध कथा यह है:
स्तुलिभद्र बहुत धनी और विद्वान व्यक्ति थे, और उनमें अपने धन, वैभव और विद्या का अभिमान था। उनकी माता 'श्रीकण्ठा' ने उन्हें सही मार्ग पर लाने के लिए जैन साधु आचार्य धर्मघोष के पास भेजा। आचार्य धर्मघोष ने स्तुलिभद्र से कहा कि वे ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण करें, लेकिन स्तुलिभद्र को अपने सांसारिक सुख, ऐश्वर्य और विद्या का बहुत अभिमान था, इसलिए वे तुरंत तैयार नहीं हुए।
परंतु, धीरे-धीरे आचार्य धर्मघोष के उपदेश एवं प्रभाव से स्तुलिभद्र का अभिमान दूर हुआ और उन्होंने जैन धर्म के नियमों का पालन करना शुरू किया। बाद में वे महान तपस्वी एवं मुनि बने।
सारांश: स्तुलिभद्र को अपने धन, ऐश्वर्य और विद्या का अभिमान था, जिसका त्याग उन्होंने आचार्य धर्मघोष के मार्गदर्शन में किया।
यह कथा जैन साहित्य, विशेषकर 'उपदेशमाला' और 'कथा कोष' आदि ग्रंथों में मिलती है।