Sanat Kumar ko Kiska Abhiman tha
जैन धर्म के अनुसार, सनत कुमार चौथे बालभद्र (Balabhadra) माने जाते हैं। उनके जीवन की कथा में अभिमान (अहंकार) का उल्लेख प्रसिद्ध है। कथा के अनुसार, सनत कुमार को अपने रूप और सौंदर्य का बड़ा अभिमान था। वे अत्यंत सुंदर, प्रभावशाली और शक्तिशाली थे, जिससे उन्हें अपने सौंदर्य और तेज का घमंड हो गया था।
इस अभिमान को दूर करने के लिए इंद्र ने एक लीला रची और अंततः सनत कुमार को यह अनुभव कराया कि यह सब नश्वर है और आत्मा ही शाश्वत है। तब सनत कुमार का अभिमान दूर हुआ और उन्होंने जैन धर्म के अनुसार आत्मकल्याण के मार्ग को अपनाया।
इस प्रकार, सनत कुमार को अपने रूप और सौंदर्य का अभिमान था।