Lok or agam mai shade vayavar kis apksha sa hota hai
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Answer
Jain Agam mein “Ṣaḍ Dravya” यानी छह द्रव्य को dravya-apeksha — अर्थात् द्रव्य की अपेक्षा से कहा जाता है।
छह द्रव्य हैं:
- Jīva — जीव
- Pudgala — पुद्गल
- Dharma Dravya — गति में सहायक द्रव्य
- Adharma Dravya — स्थिति/विश्राम में सहायक द्रव्य
- Ākāśa — आकाश
- Kāla — काल
Explanation
यदि आपका प्रश्न है: “लोक या आगम में षड्द्रव्य किस अपेक्षा से होते हैं?” तो उत्तर है कि वे द्रव्य अपेक्षा से होते हैं।
जैन दर्शन में वस्तु को अलग-अलग अपेक्षाओं से समझाया जाता है, जैसे:
- Dravya-apeksha — substance की दृष्टि से
- Kshetra-apeksha — स्थान की दृष्टि से
- Kāla-apeksha — समय की दृष्टि से
- Bhāva-apeksha — अवस्था/भाव की दृष्टि से
इसी प्रकार षड्द्रव्य का वर्णन मुख्य रूप से द्रव्य की अपेक्षा से किया जाता है।
Spiritual Understanding
षड्द्रव्य को समझने से Jain Dharma में लोक का स्वरूप समझ में आता है। यह जानने में सहायता मिलती है कि संसार केवल जीव या पदार्थ से नहीं बना, बल्कि उसमें गति, स्थिति, स्थान और समय जैसे तत्त्वों की भी व्यवस्था है।
Takeaway
संक्षेप में: लोक और आगम में षड्द्रव्य “द्रव्य अपेक्षा” से कहे जाते हैं।