अप्रत्याष्यनीउ आदे दइ ४ तिर्यंच गति ग्राहक
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क्षमा करें, आपके वाक्य में कुछ शब्द स्पष्ट नहीं हैं — जैसे “अप्रत्याष्यनीउ” और “आदे दइ ४”। इसलिए मैं निश्चित रूप से अर्थ नहीं बता सकता।
यदि आपका प्रश्न जैन कर्म-सिद्धांत में तिर्यंच गति के 4 कारण / ग्राहक के बारे में है, तो कृपया मूल पंक्ति या संदर्भ थोड़ा स्पष्ट लिखें।
जैन परंपरा में अस्पष्ट या अप्रमाणित पाठ का अर्थ अनुमान से बताना उचित नहीं है।
कृपया आप यह भेजें:
- पूरा श्लोक / गाथा / सूत्र
- किस ग्रंथ या पाठ से है
- आपको अर्थ चाहिए या व्याख्या
फिर मैं जैन परंपरा के अनुसार सही अर्थ समझाने का प्रयास करूँगा।