जैन धर्म में उपकरण के भेद , उत्तर आ से शुरू
जैन धर्म में "उपकरण" (उपकरण, जो कि भोग्य पदार्थों के भेद हैं) के भेदों का वर्णन किया गया है। आपके प्रश्नानुसार, "आ" से शुरू होने वाले उपकरण के भेद निम्नलिखित हैं:
आसन आसन का अर्थ है—वह वस्तु जिस पर बैठा जाता है। यह उपकरण का एक भेद है। साधु आहार ग्रहण, ध्यान, स्वाध्याय आदि के समय आसन का प्रयोग करते हैं।
आच्छादन आच्छादन का अर्थ है—ढकने या ओढ़ने की वस्तु। जैसे चादर, कम्बल आदि। मुनि शरीर को ढकने के लिए आच्छादन का उपयोग करते हैं।
ये दोनों "आ" से शुरू होने वाले उपकरण के भेद हैं, जिनका उल्लेख जैन धर्म के आगमों एवं ग्रंथों में मिलता है।