रोज़ मंदिर में नमोकार मंत्र, इरियावहीय सूत्र और लोगस्स सूत्र का पाठ कैसे करे?
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Answer
रोज़ मंदिर में नमोकार मंत्र, इरियावहीय सूत्र और लोगस्स सूत्र का पाठ शांत मन, विनय और शुद्ध भाव से किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य है—अहिंसा भाव, आत्म-शुद्धि, विनय, क्षमा और तीर्थंकरों के गुणों का स्मरण।
मंदिर में पाठ करने की सामान्य विधि
- मंदिर में प्रवेश से पहले शरीर और मन को यथासंभव शुद्ध रखें।
- मंदिर में शांत भाव से प्रवेश करें।
- परमात्मा के सामने विनयपूर्वक खड़े होकर या बैठकर दर्शन करें।
- मन को एकाग्र करें और सांसारिक विचारों को कम करने का प्रयास करें।
- फिर क्रम से पाठ करें।
सामान्य क्रम
- 1. नमोकार मंत्र
- 2. इरियावहीय सूत्र
- 3. लोगस्स सूत्र
1. नमोकार मंत्र का पाठ
कैसे करें:
- हाथ जोड़कर या विनय मुद्रा में शांत मन से पाठ करें।
- हर पद को श्रद्धा से बोलें।
- भाव रखें कि मैं पंच परमेष्ठी को नमस्कार कर रहा/रही हूँ।
भाव:
- अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु—इन पंच परमेष्ठी को नमस्कार।
- यह मंत्र किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि सर्वोच्च गुणों की वंदना है।
2. इरियावहीय सूत्र का पाठ
कैसे करें:
- इरियावहीय सूत्र प्रायः चलने-फिरने आदि में हुई सूक्ष्म हिंसा के लिए क्षमा-भाव से बोला जाता है।
- पाठ करते समय मन में यह भाव रखें कि अनजाने में हुई जीव-हिंसा के लिए मैं पश्चाताप करता/करती हूँ।
- इसे बहुत सावधानी और भावपूर्वक बोलें।
भाव:
- चलने, बैठने, उठने, बोलने या अन्य क्रियाओं में यदि सूक्ष्म जीवों को कष्ट पहुँचा हो, तो उसके लिए क्षमा माँगना।
- आगे अधिक सावधानी और अहिंसा का संकल्प करना।
3. लोगस्स सूत्र का पाठ
कैसे करें:
- लोगस्स सूत्र में चौबीस तीर्थंकर परमात्माओं की स्तुति की जाती है।
- इसे श्रद्धा, विनय और एकाग्रता से बोलें।
- हर तीर्थंकर के गुणों का स्मरण करने का भाव रखें।
भाव:
- चौबीस तीर्थंकरों के केवलज्ञान, वीतरागता और मोक्षमार्ग के उपदेश का स्मरण।
- उनके गुणों को अपने जीवन में लाने की भावना।
पाठ करते समय ध्यान रखने योग्य बातें
- पाठ जल्दी-जल्दी न करें।
- शब्दों का उच्चारण यथासंभव सही करें।
- मन को भटकने न दें।
- दिखावे के लिए नहीं, आत्म-शुद्धि के लिए पाठ करें।
- यदि पूरा पाठ याद न हो, तो किसी ज्ञानी व्यक्ति या गुरुजन से सही उच्चारण सीखें।
- मंदिर में शांति, मर्यादा और विनय बनाए रखें।
Spiritual Understanding
- नमोकार मंत्र हमें गुणों की पूजा सिखाता है।
- इरियावहीय सूत्र हमें अहिंसा, सावधानी और क्षमा का अभ्यास कराता है।
- लोगस्स सूत्र हमें तीर्थंकर परमात्माओं के वीतराग मार्ग से जोड़ता है।
Takeaway
मंदिर में इन तीनों पाठों को केवल बोलना ही पर्याप्त नहीं है। उनका सही भाव है—विनय, क्षमा, अहिंसा, आत्म-जागृति और वीतराग परमात्मा के गुणों का स्मरण। शांत मन से, सही उच्चारण के साथ और शुद्ध भाव से किया गया पाठ आत्मा के लिए अत्यंत मंगलकारी होता है।